कोरोना वायरस हमारे दिमाग़ पर अटैक कर सकता है ?

इस वक़्त पूरी दुनिया के वैज्ञानिक सिर्फ़ एक ही विषय पर शोध कर रहे हैं। और वो विषय है कोरोना वायरस। अब तक ये माना जाता रहा है कि कोरोना वायरस हमारे respiratory system को अटैक करता है। लेकिन अब रिसर्च इस बात पर भी चल रही है कि क्या कोरोना वायरस हमारे दिमाग पर भी अटैक कर सकता है ? 

पहले ये समझिए कि ये सवाल क्यों उठा ? 

केस 1 

अमेरिका में इस वर्ष ऐसा मामला सामने आया है जहां एक महिला को Covid 19 के symptoms की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्हें बुखार, खांसी, और शरीर में दर्द की शिकायत थी। इसके साथ ही महिला को confusion, lethargy और disorientation जैसे symptoms भी थे। इसे लेकर जब टेस्ट किए गए तो पता चला कि उन्हें acute necrotising encephalopathy (ANE) है। इसे आप दिमाग़ में सूजन समझ सकते हैं। 

केस 2 

इसी वर्ष चीन मे भी एक महिला को अस्पताल में भर्ती किया गया। उन्हें पैरों में दर्द और थकान की शिकायत थी। जांच के बाद पता चला कि उन्हें Guillain-Barré syndrome है जो एक तरह की दिमाग की बीमारी होती है। इसके बाद उनमें Covid 19 के symptoms भी विकसित होने लगे। ‘The Lancet’ मैगेज़ीन में प्रकाशित उनकी केस रिपोर्ट में ये अंदाज़ा लगाया गया कि Guillain-Barré syndrome के विकास के लिए Corona Virus संक्रमण जिम्मेदार हो सकता है। 

केस 3 

चीन में ही एक और मामला सामने आया जिसमें एक व्यक्ति को Covid 19 के symptoms के लिए भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान पाया गया कि मरीज़ के दिमाग और Spinal Cord में cerebrospinal fluid होता है जिसमें कोरोना वायरस के अंश पाए गए। 

तीनों ही केस इस ओर इशारा करते हैं कि कोरोना वायरस का हमारे दिमाग़ से कनेक्शन हो सकता है। लेकिन ये पहली बार नहीं है कि शोधकर्ताओं को इस तरह के संकेत मिले हैं। अब कुछ वर्ष पीछे चलते हैं। 

इससे पहले ये जान लीजिए कि कोरोेना वायरस के परिवार में सात सदस्य हैं। और ये सभी इंसानों को संक्रमित कर सकते हैं। इनमें SARS वाला Sars-CoV तो है ही, Covid 19 वाला Sars-CoV-2 भी है। इस परिवार के बाकी वायरस भी काफी ख़तरनाक होते हैं। कोरोना वायरस के परिवार के इन्हीं सदस्यों को इंसानी दिमाग़ में पाया गया है।

वर्ष 2000 में कनाडा के रिसर्चर्स ने पाया कि कोरोना वायरस परिवार के दो सदस्य neurological disorders की वजह बने थे। इसके लिए 90 मरीज़ों पर शोध किया गया, जिसमें से 44% मरीज़ में एक तरह का कोरोना वायरस पाया गया और 23% मरीज़ों में दूसरी तरह का। इस रिसर्च को इस बात के लिए अहम माना गया कि कोरोना वायरस इंसानी दिमाग पर अटैक कर सकते हैं। 

जब दुनिया में SARS ने अटैक किया था तब भी शोधकर्ताओं ने माना था कि SARS से संक्रमित मरीज़ों में दिमाग से जुड़ी समस्याएं देखी गई हैं। इसके बाद 2005 में चीन के शोधकर्ताओं नें SARS पीड़ित व्यक्ति के दिमाग से लिए गए सैम्पल पर शोध किया और उन्हें इस बात के सबूत मिले कि इंसान के दिमाग में SARS का वायरस था। 

2008 में अमेरिका में वैज्ञानिकों ने SARS वायरस पर रिसर्च किया। ये रिसर्च चूहों पर किया गया, जहां ये वायरस चूहों के नाक से होकर उनके दिमाग तक पहुंच जाता है। ऐसे शोेध इस बात को मानने पर मजबूर करते हैं कि कोरोना वायरस का परिवार इंसान के दिमाग को संक्रमित कर सकता है। 

इसे लेकर अलग-अलग तरह की थ्योरी भी हैं। एक थ्योरी कहती है कि चूहों वाला शोध सही है। वायरस spinal cord के ज़रिए nerve endings की मदद से दिमाग में पहुंचता है। जबकि दूसरी थ्योरी बताती है कि कोरोना वायरस spinal cord के fluid में मौजूद receptors से जुड़ जाते हैं और इसकी मदद से  वो हमारे central nervous system में प्रवेश करता है। 

इन सभी शोधों में दो समानताएँ हैं। एक, ये इशारा करती हैं कि वायरस दिमाग़ को भी संक्रमित कर सकता है। और दूसरा इन सभी शोधों पर कुछ औेर शोध करने की ज़रूरत है। यानी इतने वर्षों के बाद भी ये पूरी तरह साबित नहीं हुआ है कि वायरस दिमाग़ को संक्रमित कर सकता है या नहीं। ये अनुमान ज़रूर लगाया जा रहा है कि कोरोना वायरस से हुई मौतों में से कुछ मौतें दिमागी संक्रमण की वजह से भी हुई होंगी।