ये वायरस क्या होता है ?

कोरोना वायरस अचानक ही हमारी ज़िंदगी में कैसे आ गया ? ये वायरस क्या होता है? हमारे शरीर में क्या करता है? कैसे हमें नुक़सान पहुँचाता है? ऐसे तमाम सवाल मन में आते हैं। आइए आज इनके जवाब ढूँढते हैं। 

वायरस एक लैटिन शब्द से आया है जिसका मतलब होता है ‘विषैला’ या ‘ज़हर’। 

वायरस क्या होता है?
वायरस अपने आप में सक्रिय नहीं होते हैं। वो आलसी पैकेट्स की तरह होते हैं जो अपने आप कुछ नहीं करते हैं। और हज़ारों वर्षों तक यूँ ही पड़े रह सकते हैं। लेकिन किसी शरीर में जाते ही वो सक्रिय हो जाते हैं। वो शरीर किसी का भी हो सकता है। किसी इंसान, जानवर, पौधा, बैक्टीरिया, fungi, protozoa का भी जिसे वायरस संक्रमित कर सकते हैं। यहां तक कि एक वायरस दूसरे वायरस को भी संक्रमित कर सकता है। वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद उसे बीमार कर देता है। 

वायरस के बारे में सबसे दिलचस्प बात ये है कि सारे वायरस ख़राब नहीं होते हैं। सारे वायरस आपको नुक़सान नहीं पहुँचाते हैं। कुछ वायरस अच्छे होते हैं। वायरस DNA या RNA के बने होते हैं। और हमारे शरीर में मौजूद DNA का बड़ा हिस्सा इन वायरस से आता है। इसका मतलब ये कि बहुत सारे अलग-अलग तरह के वायरस ने हमारे पूर्वजों के शरीर में प्रवेश किया होगा और काफ़ी समय हमारे शरीर में रहा होगा। जिसकी वजह से हमारे और वायर सके बीच ढेर सारी समानताएँ हैं। 

जब हमें ज़ुकाम होता है तो उसकी वजह भी वायरस ही होता है। कोेरोना वायरस एक तरह का ज़ुकाम वाला वायरस है। वैसे जुकाम की वजह 200 से ज़्यादा वायरस हो सकते हैं जो नाक और गले में संक्रमण करते हैं। इनमें सबसे आम है Rhinovirus, जो 10 से 40 प्रतिशत  बार जुकाम के लिए जिम्मेदार होता है। बच्चों में एक साल में 6-8 बार ज़ुकाम होता है। जबकि बड़ों को एक साल में 3-4 बार ज़ुकाम होता है। और ये तो हम जानते हैं कि ज़ुकाम कितनी आसानी से खाँसने और छींकने से फैलता है। 

वायरस कैसे फैलता है ?
कोरोना वायरस के बारे में इतना सब कुछ सुनने और पढ़ने के बाद अब हम जानते हैं कि वायरस कैसे फैलते हैं। वायरस एक जीवित प्राणी से दूसरे जीवित प्राणी में फैलता है। जैसा कि हमने देखा है वायरस किसी के छींकने, खाँसने की वजह से उस शरीर से निकलता है और या तो हवा की मदद से दूसरे शरीर तक पहुँचते हैं। इसके अलावा वायरस अलग-अलग सतहों पर कुछ समय के लिए सक्रिय रहते हैं और फिर इन सतहों के सम्पर्क में आने से किसी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। कुछ वायरस मच्छर जैसे  माध्यमों से भी एक जगह से दूसरी जगह पहुँचते हैं और संक्रमण फैलाते हैं। 

सबसे बड़ा वायरस
सबसे बड़ा वायरस Mimivirus है। ये 400 नैनोमीटर (0.0004 मिलीमीटर) diameter का है। इसमें 1,200,000 nucleotides की लंबाई और 900 से अधिक प्रोटीनों के लिए कोड है। 

सबसे छोटा वायरस
जबकि सबसे छोटा वायरस Circovirus है। ये 20 नैनोमीटर (0.00002) diameter का है। वायरल जीनोम लंबाई में 1,700 न्यूक्लियोटाइड है और दो प्रोटीनों के लिए कोड है। 

इंसानों में पहला वायरस
मशहूर वैज्ञानिक वॉल्टर रीड ने 1901 में पहले ऐसे वायरस की खोज की जो इंसानों में पाया गया। इस वायरस की वजह से लोगों में पीला बुखार (yellow fever_ हुआ था। 

वायरस का इलाज क्या है ?
एक और दिलचस्प बात ये है कि वायरस पर एंटीबायोटिक्स का असर नहीं होता है। यहाँ तक कि antiviral drugs भी वायरस का इलाज नहीं है, ये बस वायरस को और बढ़ने से रोकते हैं। Antiviral drugs वायरस के replication cycle को रोक देते हैं। देखा जाए तो वायरस का इलाज सिर्फ वैक्सीन है।

कोरोना वायरस कहां से आया ?
कहते हैं चमगादड़ कोरोना वायरस का अड्डा होते हैं। चमगादड़ों में अलग-अलग तरह के कोरोना वायरस मिलते हैं। 2019-2020 का कोरोना वायरस संक्रमण भी चमगादड़ की वजह से ही फैला। इसे लेकर एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है। ये तो हम जानते ही हैं कि कोरोना वायरस चीन से फैलना शुरु हुआ था। कहा जाता है कि चीन के किसी इलाक़े में एक चमगादड़ ने आकाश में मंडराते हुए अपने लीद के ज़रिए कोरोना वायरस का अवशेष छोड़ा जो जंगल में ज़मीन पर गिरा। जंगल में जंगली जानवर इसके सम्पर्क में आए। और उनके ज़रिए ये बाक़ी जानवरों में भी फैल गया। इसके बाद संक्रमित जानवर इंसान के संपर्क में आए और इंसान भी संक्रमित हो गए। देखा जाए तो फ़िलहाल Patient zero एक महिला है जो चीन के ही एक बाज़ार में झीगा बेचती है। 

वैज्ञानिक इस कहानी को साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। वो घटनाओं की कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रहे है। हो सकता है जल्द ही हमें पता चल सके कि क्या कोरोना वायरस जानवरों की वजह से फैला ? क्या चमगादड़ सचमुच बड़ी संख्या में अलग-अलग तरह के कोरोना वायरस के अड्डा होते हैं ? US Centre for Disease Control and Prevention के अनुसार, कोरोना वायरस कोरोनविर्यूज़ वायरस का समूह है जो आमतौर पर जानवरों के बीच पाया जाता है और कुछ दुर्लभ मामलों में इसे जूनोटिक कहा जाता है।

वैसे वैज्ञानिकों को दूसरा शक पैंगोलिन पर है। ये जानवर विलुप्त होने की कगार पर है। ये तय है कि कोरोना वायरस पैंगोलिन में पाया जाता है। इसलिए ये भी इस बार कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने के लिए ज़िम्मेदार हो सकते हैं। चीन के बाज़ार में ये जानवर बेचे जाते हैं, जहां से लोग इन्हें ख़रीदते हैं। 

वैसे वायरस के बारे में जितना जानें उतना कम हैं। पिछले कुछ समय में हमने कई तरह के वायरस का इंसानों पर अटैक देखा है। जैसे ईबोला, एचआईवी, सार्स और अब कोरोना वायरस। 

कैसे मरेगा कोरोना वायरस ?
चीन से ही कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला सामने आया है और अब चीन के ही नेशनल हेल्थ कमीशन की ओर से गाइडलाइन जारी कर बताया गया है कि कुछ उपायों से वायरस को खत्म किया जा सकता है। 

  • Ultraviolet radiation जिसमें इस वायरस को खत्म करने की क्षमता होती है। 
  • तामपान – कोरोना वायरस को अग़ल 30 मिनट तक 56 डिग्री सेल्सियस के तापमान में रखा जाए तो इसे निष्क्रिय किया जा सकता है। 
  • क्लोरीन आधारित कीटाणुनाशक जैसे ईथर, 75 प्रतिशत एथेनॉल, पैरासिटिक एसिड और क्लोरोफार्म भी सतह पर मौजूद वायरस को मार सकते हैं।

वैज्ञानिक सभी पहलुओं पर लगातार शोध कर रहे हैं। वक़्त के साथ इन बातों की पुष्टि ज़रूर होगी। वैसे वायरस के बारे में जितना जानें उतना कम हैं। पिछले कुछ समय में हमने कई तरह के वायरस का इंसानों पर अटैक देखा है। जैसे ईबोला, एचआईवी, सार्स और अब कोरोना वायरस।