कोरोना वायरस का फ़ेवरेट डेस्टिनेशन हो सकते हैं आपके जूते

कोरोना वायरस के चक्कर में आप पूरे दिन हाथ धो रहे हैं। घर के गेट और दरवाज़े से लेकर गाड़ी तक… दूध और ब्रेड के पैकेटे से लेकर सब्ज़ियों तक… अपने आस-पास की हर चीज़ sanitise कर रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी अपने जूतों पर ध्यान दिया। क्या आपने अपने जूते sanitise किए ? वक्त के साथ कोरोना वायरस को लेकर हो रहे रिसर्च में ये बात निकलकर सामने आई है कि कोरोना वायरस अलग-अलग सतहों पर काफ़ी देर तक रहता है। इनमें आपके जूते भी हैं जिन पर कोरोना वायरस कम से कम पाँच दिनों तक रह सकता है। ऐसे में अगर आप मास्क और दस्ताने पहनकर भी दूध, सब्ज़ी लेने घर से बाहर निकले हैं तो कोरोना वायरस आपके जूतों की मदद से आपके घर में प्रवेश कर सकता है। 

कोरोना वायरस जूते पर क्यों रहता है ? 

कैलिफोर्निया के सैन डियागियो शहर की डॉ. जॉर्जियन नैनोस की मानें तो आपके जूते का सोल bacteria, fungus और virus के लिए बेहतरीन कैरियर है। जूता चाहे चमड़े का हो या कैनवास का या फिर प्लास्टिक या किसी सिंथेटिक पदार्थ का, उस पर वायरस जिंदा रह सकते हैं। कहते हैं जूतों का सोल बहुत मज़बूत होता है। उसमें नमी से बचने की क्षमता होती है। वो ज़मीन को छूता है तो उस पर गंदगी सबसे ज़्यादा लगती है। और ये सभी बातें वायरस को पनपने में मदद करती हैं। जानकार बताते हैं कि जूतों पर कोरोना वायरस पांच दिन तक जिंदा रह सकता है। 

लेकिन आपके जूतों पर कोरोना वायरस आएगा कैसे ? 

ख़ास तौर पर सुपर मार्केट, एयरपोर्ट, अस्पताल जाने वाले और पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने वाले लोगों को सतर्क रहने की ज़्यादा ज़रूरत है। किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति की खांसी, थूक और छींक के ड्रॉपलेट्स अधिकतम दो मीटर तक जा सकत हैं। ये ड्रॉपलेट्स अगर हाथ, मुंह, नाक के ज़रिए आप तक नहीं पहुँच सके तो जमीन पर गिर सकते हैं। जमीन पर पड़े इन ड्रॉपलेट्स पर आपका जूता पड़ेगा तो कोरोना वायरस उस पर आ जाएगा। इसके बाद जब आप जूते लेकर घर में आते हैं तो कोरोना वायरस भी आपके घर में आ जाता है। 

यहाँ ये भी जान लीजिए कि आपके जूतों पर सिर्फ़ कोरोना वायरस ही नहीं बल्कि 4 लाख 21 हज़ार तरह के बैक्टीरिया, वायरस आदि होते हैं। ये रिसर्च एरिज़ोना विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स द्वारा की गई। 

और आपके कपड़ों का क्या ? 

कपड़ों पर कोरोना वायरस कितनी देर रहता है इसकी समयसीमा पता नहीं चली है। लेकिन कोरोना वायरस के लिए कहा जाता है कि ये छिद्र या छेद वाली चीज़ों पर ज़्यादा देर तक नहीं रह सकता है। और हमारे कपड़े, तौलिए, चादर, जैसी तमाम चीज़ें छिद्र वाली ही होती हैं। इसलिए कोरोना वायरस कपड़ों पर बहुत लंबे समय तक जिंदा नहीं रह सकता है। फिर भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी कपड़ों को लेकर एहतियात बरतने की सलाह दी है। गंदे कपड़ों को अलग रखें, उन्हें धोते हुए इस बात का ध्यान रखें कि वो आपकी त्वचा से न छुए। कपड़ों को 60 से 90 डिग्री तापमान वाले पानी से डिटर्जेंट के साथ धोएं और अच्छी तरह सुखाएं। 

दूसरी सतहों पर कोरोना वायरस कितनी देर रहता है ? 

ये तो हुई जूतों की बात लेकिन कोरोना वायरस के जीने की क्षमता अलग-अलग सतहों पर अलग-अलग होती है। एक रिसर्च के मुताबिक कोरोना वायरस के कण हवा में 2-3 घटों तक रहता है। जबकि दूसरी सतहों पर इसका जीवन सतह के प्रकार, तापमान या वातावरण की नमी पर निर्भर करता है। जैसे – 

  • प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील की सतहों पर कोरोना वायरस 3 दिनों तक जीवित रहता है। 
  • कागज जैसी चीजों पर कोरोना वायरस 24 घंटे तक जीवित रहता है। 
  • तांबे की सतह पर कोरोना वायरस 4 घंटे तक बना रहता है। 
  • कार्डबोर्ड और पॉलीथीन पर कोरोना वायरस 24 घंटे तक जिंदा रहता है। 
  • रबड़ पर कोरोना वायरस 8 घंटे तक ज़िंदा रहता है। 
  • एल्युमिनियम पर कोरोना वायरस 6 घंटे तक जीवित रहता है। 
  • लकड़ी पर कोरोना वायरस 4 घंटे तक बना रहता है। 

इससे बचने का तरीक़ा क्या है ? 

जूतों की बात करें तो जूतों की सफ़ाई का ख़ास ध्यान रखा जाए। लेदर के जूतों को 70 प्रतिशत एल्कोहल वाले किसी भी disinfectant material से साफ करें। ख़ास तौर पर जूते के सोल को साफ करना चाहिए। फीते और हील को साफ करना कतई न भूलें। लेकिन हर सतह को साफ करना मुश्किल है। आप बाहर से लाई हुई फल, सब्ज़िया, दूध, ब्रेड के पैकेट ज़रूर साफ़ कर लेते होंगे। फिर भी ज़रूरी है कि किसी भी सतह को छूने के बाद आप अपने हाथों को ज़रूर धोएं, लगातार धोते रहें। मुंह, आंख, नाक को छूने से बचें। 

स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें।