‘Covid-19 की पुष्टि’ की परिभाषा क्या है ? 

ये कैसे पता चले कि किसे कोरोना वायरस है और किसे नहीं… इसके लिए WHO का नियम कहता है कि कोई व्यक्ति जिसे प्रयोगशाला परीक्षण द्वारा इस वायरस से संक्रमित दिखाया गया हो, फिर भले ही उसमें लक्षण मौजूद हो या नहीं हों, वो कोरोना वायरस से पीड़ित है। हालाँकि चीन में रिपोर्ट किए गए कुछ मामलों में प्रयोगशाला पुष्टि के बिना ही Covid-19 के लक्षण देखकर लोगों में Covid-19 की पुष्टि की गई है।

COVID-19 का कारण बनने वाले कोरोना वायरस का टेस्ट कैसे किया जाता है ? 

इस टेस्ट का नाम है real-time polymerase chain reaction (PCR) test. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के मुताबिक ये टेस्ट गले के पीछे से इकट्ठा किए गए स्वाब पर किया जाता है। ये lower respiratory tract से लिया गया liquid sample हो सकता है या फिर सिर्फ आपके मुंह की लार या थूक या नाक से लिए गए सैम्पल से भी ये टेस्ट किया जा सकता है। इस तरह के परीक्षणों को आमतौर पर इन्फ्लुएंजा ए, इन्फ्लुएंजा बी और एच 1 एन 1 वायरस का पता लगाने के लिए भी किया जाता है। 

Real-time Polymerase Chain Reaction (PCR) टेस्ट क्या है?

Corona virus RNA से बना वायरस है। जिसे DNA में बदलना होता है। इसके लिए reverse transcription तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। एक ‘Reverse Trascriptase’ enzyme RNA को DNA में बदल देता है। इसके बाद DNA की copies बनाई जाती हैं। DNA binding के fluorescent dye की मदद से वायरस का पता चलता है। इससे हम Corona virus को अन्य वायरस से अलग भी कर सकते हैं।

PCR टेस्ट में कितना समय लगता है?

आईसीएमआर के वैज्ञानिकों का मानें तो नमूने इकट्ठे करने से लेकर रिपोर्ट आने तक 24 घंटे का समय लग सकता है। वैसे रियल-टाइम पीसीआर टेस्ट में नमूनों का परीक्षण करने में पहले 6 घंटे लगते थे जिसे घटाकर अब लगभग साढ़े चार घंटे किया गया है। 

भारत में परीक्षण कैसे किया जा रहा है?

भारत में कोरोना वायरस का PCR परीक्षण दो-चरणों में होता है। पहले चरण में हमारे शरीर से लिए गए सैम्पल में मौजूद genetic elements का पता लगाने की कोशिश की जाती है। और दूसरे चरण में ये टेस्ट किया जाता है कि शरीर से लिए गए सैम्पल से मिले genetic material का कोरोना वायरस में मौजूद genetic material से कोई सम्बन्ध है या नहीं। इस परीक्षण की मदद से ही पता लगाया जाता है कि आपको कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी Covid 19 है या नहीं। 

शुरुआत में इन नमूनों का परीक्षण तो पूरे देश में होता था लेकिन पुष्टिकरण के लिए नमूनों को पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में भेजा जाता था। लेकिन जब देश में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने लगे और दुनिया की हालत को देखने और समझने के बाद अब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने सभी प्रयोगशालाओं के लिए कोरोना वायरस के पुष्टिकरण के लिए ज़रूरी तकनीक साझा की है। जिसकी वजह से अब नमूनों को पुणे भेजने की ज़रुरत नहीं हैं। इससे नमूनों के परीक्षण में लगने वाला समय भी कम हो गया है। 

PS : PCR तकनीक का आविष्कार करने वाले अमेरिकी जैव रसायन वैज्ञानिक कैरी मुलिस को 1993 में रसायन विज्ञान के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।