8 Feb : Nida Fazli – The Unforgettable

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता

बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले
ये ऐसी आग है जिसमें धुआँ नहीं मिलता

तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो
जहाँ उम्मीद हो सकी वहाँ नहीं मिलत

कहाँ चिराग़ जलायें कहाँ गुलाब रखें
छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता

ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैं
ज़बाँ मिली है मगर हमज़बाँ नहीं मिलता

चिराग़ जलते ही बीनाई बुझने लगती है
खुद अपने घर में ही घर का निशाँ नहीं मिलता

Perfect lines to remember renowned poet and lyricist Nida Fazli. He died today, ending 5 decades of poetry and writings. His pen never approved any restrictions but need of money made him write commercially. His lyrics for many films have made history. His compilation of essays on contemporary poets outraged a few of them boycotting his poetic sessions. But Nida Fazli was a man of words. He never got worried about his image.

Nida Fazli is no more with us, but his writings would keep us inspiring and entertaining for many generations to come.

#Hindi
मशहूर ऊर्दू शायर और गीतकार निदा फाज़ली की ये पंक्तियां आज उनके निधन पर याद आती हैं। चंद लफ्ज़ों में ज़िंदगी का फलसफा कह देने का हुनर निदा फाज़ली को खूब आता था। अपने लेखन को चमक-दमक से दूर रखने की कोशिश करने वाले निदा फाज़ली को आखिरकार पैसों की कमी ने हरा दिया। उन्होंने अपने जीवन-यापन के लिए फिल्मों में लिखना शुरु किया और वहां भी उनके शब्दों ने इतिहास रच दिया।
निदा फाज़ली आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी लेखनी हमेशा हमारे दिलों में उनकी याद को ताज़ा रखेगी।

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़कर वो भी हम जैसे हो जाएँगे

दुनिया जिसे कहते हैं बच्चे का खिलौना है
मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है

घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए

हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिस को भी देखना हो कई बारदेखना

Nida Fazli had a very strong bonding with Late ghazal singer Jagjit Singh. Incidentally today is Jagjit Singh’s 77th Birthday.

In remembrance of the two legends, here is a song written by Nida Fazli and sung by Jagjit Singh.