6 Jan : How Maria Montessori created play schools for your child ?

Meet a visionary woman, who gave birth to the idea of play based learning for children. She was Maria Montessori, founder of the Montessori method of education. On 6 January, 1907 She opened her first school and daycare center for working class children in Rome, Italy. It was called Case dei Bambini in italian which means Children’s house. Children’s house had traditional tables, chairs, blackboard, but along with that there were toys, swings, colours, educational games and special arrangement for special kids. Just like it’s name, it was a second home for kids.

The Indian Touch !
For India the system of Montessori came in 1913, only when an Indian student attended the first international course in Rome, and students throughout the 1920s and 1930s came back to India to start schools and promote Montessori education. By 1929, Indian poet Rabindranath Tagore had founded many “Tagore-Montessori” schools in India.

Maria Montessori with Kids

Mahatma Gandhi was very interested in the Montessori system of education. He met Maria Montessori in London in 1931. On Maria Montessori’s invitation, Gandhi spoke at the Montessori Training College in London. Gandhi also invited Maria to come over to India and bring her ‘Montessori education’ concept for the poor and deprived children here. Montessori kept her promise when she visited India in 1940. 

MMGandhi

This concept of Montessori Education is like one of the feathers in Maria’s cap.
*She was called an Educational Rock star.
*She was the first woman to obtain Doctor of Medicine from University of Rome.
*In the fall of 1913, two of her admirers — Thomas Edison and Alexander Graham Bell, invited her to come to the United States to give an address at Carnegie Hall.

#Hindi 
क्या आप जानते हैं कि आपके बच्चे के प्ले स्कूल की सोच कहां से आई? बहुत पुरानी बात नहीं है… महज़ 110 साल पहले एक महिला ने इसके बारे में सोचा और इसकी शुरुआत की… महिला का नाम था मारिया मोंटेसरी… जिनके नाम पर आज भी ‘मोंटेसरी स्कूल’ जाने जाते हैं…
6 जनवरी, 1907 को मारिया ने पहला मोंटेसरी स्कूल, रोम में शुरु किया था… इटली में इसे Case dei Bambini कहते हैं जिसका मतलब होता है बच्चों का घर। यहां किसी क्लासरूम की परंपरागत चीज़ों के अलावा खेलने के लिए तरह-तरह के खिलौने भी होते हैं… जिनसे बच्चे खेल-खेल में पढ़ाई करते हैं और ज़िंदगी के अनुभव लेते हैं… रंगों से आकृतियां बनाना, झूले झूलना, मिल बांट कर खाना, साथ खेलना, हंसना, रोना… सब कुछ बच्चे एक दूसरे के साथ रहकर सीखते हैं…
ये कुछ ऐसा था जिसका पूरी दुनिया ने खुले दिल से स्वागत किया… भारत में मोंटेसरी स्कूलों की शुरुआत 1913 में हुई, जब यहां के कुछ स्टूडेंट्स रोम में मोंटेसरी स्कूलों की पढ़ाई करने गए और भारत लौटकर ऐसे स्कूल यहां खोले… बाद में 1929 में रबींद्रनाथ टैगोर ने भी ‘टैगोर मोंटेसरी’ की शुरुआत की… महात्मा गांधी भी मोंटेसरी स्कूलों के पक्षधर थे… कहा जाता है कि लंदन में एक मुलाकात के दौरान उन्होंने मारिया मोंटेसरी से भारत के बच्चों के लिए भी इस तरह के स्कूल खोलने और चलाने की बात कही थी… 1940 में जब मारिया भारत आईं, तो उन्होंने महात्मा गांधी से किए अपने वादे को पूरा किया… उन्होंने यहां टीचर्स को मोंटेसरी स्कूलों की विधा सिखाई…
अपना पूरा जीवन बच्चों और उनकी पढ़ाई को समर्पित करने वाली मारिया मोंटेसरी का जन्म 1870 में हुआ था… महज़ 37 साल की उम्र में उन्होंने इस बड़े बदलाव की नींव रखी थी… उन्होंने पूरी दुनिया घूमी और अपने अनुभवों को किताबों के रूप में दुनिया के सामने रखा… महिलाओं के अधिकार के लिए भी मारिया लगातार आवाज़ उठाती रहीं…