5 March : Colt’s revolver hit the shot

The famous hindi movie dialogue :
इस रिवॉल्वर की छ की छ गोलियां तेरे सीने में उतार दूंगा। 
The dialogue was written in late 60s or 70s but its foundation was laid way back today in 1836, when Connecticut-born gun manufacturer Samuel Colt received a US patent for a revolver mechanism. This enabled a gun to fire multiple times without reloading unlike its predecessors.

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Today in 1836, Samuel Colt formed Patent Arms Manufacturing, the forerunner of Colt’s Firearms Manufacturing Company which in turn became today’s Colt’s Manufacturing Company. Colt got this idea from a ship voyage. Colt was sent on a ship by his father, as punishment in 1830. During the voyage, 16 year old became fascinated by how the ship’s wheel could spin or be locked in an affixed position through the use of clutch. This observation sparked the idea of a revolving chamber capable of holding six bullets. Thus, was made the modern revolver.
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Colt had spent his spare time carving a wooden toy gun in which the usual single-shot cartridge chamber was replaced by a six-chamber revolving cylinder. He was not the first to think of the revolver or repeater firearm, but his design outlined most others.

#Hindi 
फिल्मों में आपने कई बार देखा होगा… या फिर कॉमिक्स में पढ़ा होगा… एक के बाद एक रिवॉल्वर की छ गोलियां चलाई जाती हैं – धांय, धांय, धांय, धांय, धांय, धांय… और दुश्मन ढेर। लेकिन ऐसा बस किस्से-कहानियों में ही अच्छा लगता है। फिर भी सोचिए ये आइडिया किसके दिमाग में आया होगा कि ऐसे छ गोलियां एक के बाद एक चलाई जा सके। ये कमाल था बंदूक बनाने वाले सैमुअल कोल्ट का। उन्होंने 1836 में आज ही के दिन रिवॉल्वर से एक के बाद एक छ गोलियां मारे जाने की तकनीक को पेटेंट कराया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि कोल्ट को ये युक्ति तब आई जब वो सज़ा के तौर पर एक समुद्री यात्रा पर भेजे गए थे। तब कोल्ट सिर्फ 16 साल के थे। उन्होंने वहां जहाज के पहियों को देखा, जिसे क्लच की मदद से रोका और बढ़ाया जा सकता था। बस, इसे देखकर कोल्ट के दिमाग में ऐसा रिवॉल्वर बनाने का आइडिया आया जिसमें एक घूमता हुआ चैम्बर बनाया जा सकता था। इसी चैम्बर में एक साथ छ गोलियां भरी जा सकती थी। एक के बाद फायर करने पर चैम्बर घूमता जाता और गोलियां चलती जाती। कोल्ट काफी समय तक लकड़ी की खेलने वाली बंदूक पर ऐसा चैम्बर बनाने की कोशिश करते रहे… और आखिरकार उन्हें सफलता मिली।